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अभी कल ही की तो बात है...

वो हर सुबह जल्दी मां जगा दिया करती थी, कभी हाथ थामकर तो कभी मारकर स्कूल भगा दिया करती थी... हम भी बेमन अपनी पगडंडी पर उस ओर निकल जाया करते थे, शाम को जल्दी वापस घर आना है, खेलने जाना है..सोच में डूब जाता करते थे.... अभी कल ही की तो बात है.... कुछ बड़े हुए स्कूल छोड़ा और कॉलेज की राह पर खुद ही निकल जाया करते थे, मां सुबह तो अब भी जल्दी ही उठाती थी लेकिन अब हम भी उठ जाया करते थे... घर से निकलते कॉलेज जाते और मस्ती में डूबे शाम को नहीं... हां लेकिन रात को घर की ओर निकल ही आया करते थे.... अभी कल ही की तो बात है...

पगली लड़की मेरे साथ रहने को लड़ती है

अक्सर उसके मुंह से एक बात सुनाई देती है, उसके चेहरे पर हंसी में छुपी एक बात दिखाई देती है. वो नाराज भी है मुझसे और प्यार भी करती है, रूठती भी है मुझसे और मुझे मनाने को भी तरसती है. कई बार समय का हवाला देती है और खुद ही उनमें उलझी रहती है, खुद ही फिर संभालती भी है और खुद ही फिर बिगड़ती है. नाराजगी फिर भी वैसी ही रहती है और मनाने को भी तरसती है. चेहरा भी दिखाती है अपना मुझे और छुपाकर भी रखती है, कुछ कहती है फिर चुप रहती है और फिर बिन कहे बहुत कुछ कह देती है. मेरे साथ चार कदम चलने से भी मना करती है, और फिर जीवन भर साथ रहने का दावा करती है. उसकी हंसी उसकी ख़ुशी और उसकी मुस्कान बहुत कुछ कहती है. साथ देने का वादा भी मुझसे करती है और पगली लड़की मेरे साथ रहने को भी लड़ती हैं. 

ये जिन्दगी है साहब

ये जिन्दगी है साहब ऐसे ही चलती रहेगी, यहाँ कभी छांव तो कभी धूप भी निकलती ही रहेगी! ये निर्भर आप पर हैं करता कि निकलना है या नहीं, जिन्दगी तो एक झरने की तरह बहती ही रहेगी! कही दिल को दर्द होगा तो कहीं सुकून भी मिलेगा, ये गर जख्म देगी तो उसपर मरहम मलती भी रहेगी! ये जिन्दगी है साहब ऐसे ही चलती रहेगी, यहाँ कभी छांव तो कभी धूप भी निकलती ही रहेगी!

Impossible..!!

Job..!!

Mahaan Vyakti

एक कहानी-बड़ी पुरानी (4)

यार मेरे...दिलदार मेरे...चल आज अपनी कहानी लिखते हैं, कुछ मेरी मैं कहता हूं और चल कुछ तेरी जुबानी लिखते हैं. अभी कल ही की तो बात हैं जब पढ़ाई खत्म कर हम स्कूल से निकले थे, बाहर से काफी शरारती नजर आते थे, मगर अंदर से हम काफी भोले थे. याद है कॉलेज में हमने जब साथ कदम रखा था, कुछ नए यार बनाए थे और कुछ पुराने यारों को जोड़ रखा था. साथ क्लासरूम में पीछे की सीट पर वो गप्पे मारने का कॉम्पिटिशन चलता था, कभी मैं तुझसे हार जाता था तो कभी तू मुझे भी जीतता था. समय बीतता चला गया और कॉलेज को भी छोड़ देने का दिन आ गया, आगे सुनहरे सपने दिखे, मगर फिर भी चेहरे के सामने जैसे अँधेरा छा गया. फिर हम भी उसी भीड़ का एक हिस्सा बनने की तरफ चल निकले, नौकरी के चक्कर में खूब निकले मेरे अरमा, मगर फिर भी कम निकले.

गहरी बात..!!

बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में। उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।। सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे। बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।। लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार। पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।। वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए। घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई को बदलते देखा है।। सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को। आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।। जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन। आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।। जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी। आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है।। दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था  जिस बेटी को जबरन बाप ने। आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है।। मारा गया वो पंडित बे मौत सड़क दुर्घटना में यारो। जिसे खुद को काल, सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।। जिसे घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों। आज उसी ...

यकीन मानिए ये 35 लाइनें छू लेंगी आपके दिल को

1. क़ाबिल लोग न तो किसी को दबाते हैं और न ही किसी से दबते हैं। 2. ज़माना भी अजीब हैं, नाकामयाब लोगो का मज़ाक उड़ाता हैं और कामयाब लोगो से जलता हैं । 3. कैसी विडंबना हैं ! कुछ लोग जीते-जी मर जाते हैं, और कुछ लोग मर कर भी अमर हो जाते हैं ।  4. इज्जत किसी आदमी की नही जरूरत की होती हैं. जरूरत खत्म तो इज्जत खत्म । 5. सच्चा चाहने वाला आपसे प्रत्येक तरह की बात करेगा. आपसे हर मसले पर बात करेगा लेकिन  धोखा देने वाला सिर्फ प्यार भरी बात करेगा। 6. हर किसी को दिल में उतनी ही जगह दो जितनी वो देता हैं.. वरना या तो खुद रोओगे, या वो तुम्हें रूलाऐगा । 7. खुश रहो लेकिन कभी संतुष्ट मत रहो । 8. अगर जिंदगी में सफल होना हैं तो पैसों को हमेशा जेब में रखना, दिमाग में नही । 9. इंसान अपनी कमाई के हिसाब से नही,अपनी जरूरत के हिसाब से गरीब होता हैं । 10. जब तक तुम्हारें पास पैसा हैं, दुनिया पूछेगी भाई तू कैसा हैं । 11. हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ छिपा होता हैं ऐसी कोई भी मित्रता नही जिसके पीछे स्वार्थ न छिपा हो । 12. दुनिया में सबसे ज्यादा सपने तोड़े हैं इस बात ने,कि लोग क...