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अभी कल ही की तो बात है...

वो हर सुबह जल्दी मां जगा दिया करती थी,
कभी हाथ थामकर तो कभी मारकर स्कूल भगा दिया करती थी...
हम भी बेमन अपनी पगडंडी पर उस ओर निकल जाया करते थे,
शाम को जल्दी वापस घर आना है, खेलने जाना है..सोच में डूब जाता करते थे....

अभी कल ही की तो बात है....
कुछ बड़े हुए स्कूल छोड़ा और कॉलेज की राह पर खुद ही निकल जाया करते थे,
मां सुबह तो अब भी जल्दी ही उठाती थी लेकिन अब हम भी उठ जाया करते थे...
घर से निकलते कॉलेज जाते और मस्ती में डूबे शाम को नहीं...
हां लेकिन रात को घर की ओर निकल ही आया करते थे....

अभी कल ही की तो बात है...

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तुम नहीं समझोगे..!!

कैसा लगता है जब तुम कहते हो कि "तुम बस रहने दो?" तुम्हे बताऊँ...खैर रहने दो क्योंकि तुम नहीं समझोगे.. तुम नहीं समझोगे कि क्यों हम बात नहीं कर पाते, तुम नहीं समझोगे कि आखिर क्यों हम मुलाकात नहीं कर पाते... तुमने बस अपनी ही बातें करनी होती हैं मुझसे, मुझे क्या कहना है कभी तो पूछ भी लो मुझसे... मैं भी अपनी बातें बताउंगी तुम्हे...उतने ही प्यार से..वैसे ही अहसास से... मैं चाहती हूं कि बैठूं तुम्हारे पास...अपने कांपते हाथों में लेकर तुम्हारा हाथ... मगर दिल सिसक सा जाता है ऐसे ही अचानक...अमूमन... मेरे जहन में आता है कि कह दूँ तुमसे...लेकिन "तुम नहीं समझोगे" (हितेश सोनगरा)

Mahaan Vyakti

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