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एक कहानी-बड़ी पुरानी (4)

यार मेरे...दिलदार मेरे...चल आज अपनी कहानी लिखते हैं, कुछ मेरी मैं कहता हूं और चल कुछ तेरी जुबानी लिखते हैं. अभी कल ही की तो बात हैं जब पढ़ाई खत्म कर हम स्कूल से निकले थे, बाहर से काफी शरारती नजर आते थे, मगर अंदर से हम काफी भोले थे. याद है कॉलेज में हमने जब साथ कदम रखा था, कुछ नए यार बनाए थे और कुछ पुराने यारों को जोड़ रखा था. साथ क्लासरूम में पीछे की सीट पर वो गप्पे मारने का कॉम्पिटिशन चलता था, कभी मैं तुझसे हार जाता था तो कभी तू मुझे भी जीतता था. समय बीतता चला गया और कॉलेज को भी छोड़ देने का दिन आ गया, आगे सुनहरे सपने दिखे, मगर फिर भी चेहरे के सामने जैसे अँधेरा छा गया. फिर हम भी उसी भीड़ का एक हिस्सा बनने की तरफ चल निकले, नौकरी के चक्कर में खूब निकले मेरे अरमा, मगर फिर भी कम निकले.

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तूँ मेरे गांव को गँवार कहता है..!!

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तूँ मेरे गांव को गँवार कहता है। ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है, तूँ बच्ची को भी हुस्न ए बहार कहता है। थक गया है हर शख़्स काम करते करते, तूँ इसे अमीरी का बाज़ार कहता है। गांव चलो वक्त ही वक्त है सबके पास, तेरी सारी फ़ुर्सत तेरा इतवार कहता है। मौन होकर फोन पर सारे रिश्ते निभाए जा रहे हैं, तूँ इस मशीनी दौर को परिवार कहता है। वो मिलने आते थे कलेजा साथ लाते थे, तूँ दस्तूर निभाने को रिस्तेदार कहता है। बड़े-बड़े मसले हल करती थी पंचायते, अंधी भ्रस्ट दलीलों को दरबार कहता है। अब बच्चे तो बड़ों का अदब भूल बैठे हैं, तूँ इसे नये दौर का संस्कार कहता है।

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था...

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था... एक नाई, एक मोची, एक लुहार था... छोटे छोटे घर थे, हर आदमी बड़ा दिलदार था... कही भी रोटी खा लेते, हर घर मे भोजऩ तैयार था.... बाड़ी की सब्जी मजे से खाते थे जिसके आगे शाही पनीर बेकार था... दो मिऩट की मैगी ना, झटपट दलिया तैयार था.... नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार था.... छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था... . अपना घड़ा कस के बजा लेते समारू पूरा संगीतकार था.... मुल्तानी माटी से तालाब में नहा लेते, साबुन और स्विमिंग पूल बेकार था... और फिर कबड्डी खेल लेते, हमे कहाँ क्रिकेट का खुमार था.... दादी की कहानी सुन लेते,कहाँ टेलीविज़न और अखबार था.... भाई -भाई को देख के खुश था, सभी लोगों मे बहुत प्यार था.... छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था...!!