बातें शुरू हुईं या कहानी कुछ कहा नहीं जा सकता...लेकिन तेरे-मेरे बीच एक अहसास तो जरुर शुरू हुआ ही था...मैंने भी कुछ कहा ही था और तूने भी कुछ सुना ही था...बातें बेमतलब की बेहिसाब होती रही..ना जाने कब सुबह और कब शाम होती रही...
लिखने वाले साहब लेखक बनने की कगार पर हैं... 
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